डॉक्टर डंकन मेक्डूगल का आत्मा के वज़न को नापने का प्रयोग (Weighing Human Souls The 21 Grams Theory Of Doctor Duncan MacDougall)

अक्सर कहा जानता है, की इंसान को मरने के बाद अपने सभी कर्मों का हिसाब देना पड़ता है। और उसके बाद ही उसे स्वर्ग या नर्क में जगह मिलती है। मौत के बाद कुछ होता है, या नहीं यह बात बहस का विषय बनी हुई है। और अगर वास्तव में इंसान को अपने कर्मों के अनुसार जगह मिलती है, तो वह पर रहने के लिए इंसान की कोई आत्मा भी होना चाहिए।

क्या मनुष्य की कोई आत्मा है। अगर है तो क्या उसे किसी तरह नपा का सकता है, अप्रेल 1901 में आत्मा के अस्तितव के विषय मैसाचुसेट्स (Massachusetts) के फिसिशन द्वारा में एक प्रयोग किया गया था। उनका नाम था डॉक्टर डंकन मेक्डूगल (Duncan MacDougall) उनका यह मानना था की अगर आत्मा है, तो फिर उसका कोई वज़न भी होगा। जिसे मापा जा सकता है।

अपने प्रयोग के लिए उन्होंने ज़िंदगी और मौत से जूझ रहे 6 मरीज़ो को चुना। उन मरीज़ो को विशेष रूप से बनाए गए बिस्तर पर रखा गया था, जो की वज़न नापने की मशीन से जुड़े हुए थे। प्रयोग के लिए यह पूरी व्यवस्था डॉक्टरों द्वारा इतनी शूक्ष्मता से की गई थी की इससे वज़न में 1 औंस के 10वे भाग तक की आई हुई कमी को भी नपा जा सकता था। उन मरीज़ो की चुना गया था जिनकी मौत होने ही वाली थी। उन मरीज़ो में से 2 क्षय रोग (Tuberculosis) की बीमारी से ग्रस्त थे।

उन 6 मरीज़ो में से 5 पुरुष और 1 महिला थी। डॉक्टर मेक्डूगल (Dr. McDougall) का उद्देश्य मरीज़ो के वज़न में मौत से पहले और मौत के बाद आये अंतर का अध्ययन करना था। जब पहले मरीज़ की मृत्यु हुई तो उन्होंने मशीन में कुछ हलचल देखी गई। तब डॉक्टर मेक्डूगल (Dr. McDougall) ने निष्कर्ष दिया की "अचानक किसी वजह से मशीन में वज़न की गणना में कुछ कमी आई और वह उसी स्थिति में रही। 'वज़न में यह कमी एक औंस से कुछ काम थी।" किस वजह से ये कमी आई थी, यह बात अब तक स्पष्ट नहीं हो पाई है।

जब इस प्रयोग को अगले मरीज़ पर दोहराया गया तब भी यही परिणाम सामने आये। डॉक्टर मैक्डूगल (Dr. McDougall) को लगा की उन्होंने कुछ असाधारण खोज की है। सभी मरीज़ो का अध्ययन करने के बाद डॉक्टर मेग्डुगल (Dr. McDougall) ने यह निष्कर्ष दिया था की मनुष्य की आत्मा का वज़न 21 ग्राम है। जब सभी 5 डॉक्टरों ने अपनी गणना को मिलाया तो उन्होंने देखा की सभी प्रयोगो में एक ही सामना वज़न में कमी नहीं आई थी, पर कुछ न कुछ कमी तो आई ही थी जिसे नाकारा नहीं जा सकता था।

पर जब तीसरे मरीज़ का अध्ययन किया जा रहा था तब कुछ अलग हुआ। मरने के बाद भी उस मरीज़ के वज़न में कोई परिवर्तन नहीं आया और लगभग 1 मिनट तक उसका वज़न वही बना रहा। फिर अचानक उसके वज़न में 21 ग्राम की कमी देखी गई। इस बात पर डॉक्टर मेग्डुगल (Dr. McDougall) ने निष्कर्ष दिया की "इस परिस्थिति में मृत्यु के बाद आत्मा शरीर के अंदर ही कैद थी और १ मिनट के बाद वह शरीर से आज़ाद हुई, इसके अतिरिक्त और कोई कारण नहीं हो सकता।"

Weighing Human Souls The 21 Grams Theory Of Doctor Duncan MacDougall


उस समय के अखबारों में इस प्रयोग को बहुत ही नकारात्मक रूप से दिखाया गया। और प्रयोग को विचित्र बताते हुए उसकी बहुत निंदा की गई। डॉक्टर मेग्डुगल (Dr. McDougall) ने कहा की वो आत्मा के अस्तित्व को खोज रहे है। और अगर ये सिद्धांत अस्वीकार भी हो जाता है, तो हल करने के लिए यह रहस्य बना रहेगा की वज़न में यह अंतर क्यों आता है। डॉक्टर मेग्डुगल (Dr. McDougall) ने यह प्रयोग 15 कुत्तो पर भी किया, परन्तु मौत के पश्चात् उनके वज़न में कोई अंतर नहीं पाया गया। इस पर डॉक्टर मेग्डुगल (Dr. McDougall) ने यह निष्कर्ष दिया की आत्मा सिर्फ इंसानो में ही होती है। उनके इस प्रयोग की बहुत आलोचना की गई थी क्योकि कुत्तो की मौत प्राकृतिक रूप से नहीं हुई थी उन्हें ज़हर दिया गया था।

सन 1917 में लॉस एंजेलिस के पॉलिटेक्निकल हाई स्कूल के एक टीचर ने यही प्रयोग चूहों पर किया, पर उन्होंने चूहों के वज़न में कोई कमी नहीं देखी जो की डॉक्टर मेग्डुगल (Dr. McDougall) के प्रयोग को गलत साबित करता है।

इसके बाद आत्मा के वज़न का यह प्रयोग कभी नहीं किया गया। तथा कम मरीज़ो पर किये जाने के कारण, आकड़ो की कमी की वजह से और उनकी प्रयोग की विधि भी इतनी आधुनिक नहीं थी जो किसी ठोस निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए काफी हो। और उन्होंने सास के द्वारा फेफड़ो से निकलने वाली हवा जैसे महत्वपूर्ण तथ्यों पर भी ध्यान नहीं दिया था। हांलाकि आज भी ऐसे कई लोग है, जो उनके प्रयोग के परिणामो को सच मानते है, और वे ये मानते है, की मौत के बाद आत्मा शरीर से बहार निकल जाती है।

15 अक्टूबर 1920 को डॉक्टर मैकडॉगल (Dr. McDougall) की मृत्यु हो गई। लेकिन आज भी वे मनुष्य की आत्मा को खोजने वाले आदमी के रूप में याद किये जाते है। जो की 21 ग्राम है।

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