खौफनाक रशियन स्लीप एक्सपेरिमेंट की कहानी/ Scary And Creepy Story Of Russian Sleep Experiment Hindi

नींद हमारी जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। दिनभर की थकान व काम के बाद हमारे शरीर को आराम की जरूरत होती है। रात की नींद हमें उसी थकान से राहत देती है, और हमारे शरीर को ऊर्जा प्रदान करती है। और यही कारण है, कि नींद के अभाव में मनुष्य को शारीरिक और मानसिक रूप से कई गंभीर परिणामों का सामना करना पड़ सकता है।

नींद इंसान के शरीर की कुछ बहुत ज़रूरी चीज़ों में से है। कई बार आपने देखा होगा की अगर आप ठीक तरह से नहीं सोते है, तो अगले दिन आपका शरीर दर्द देता है। और ऐसा भी होता है, की अगर आप ज्यादा दिनों तक ठीक से ना सोए तो आपका मन किसी काम में नहीं लगता है।



कम नींद लेने से इंसान का के सोचने की क्षमता भी प्रभावित होती है। लेकिन अगर आप हर रोज़ ८ घंटे भी सोते है, तो जब आप १०० साल के होंगे तब तक आप अपने जीवन के ३० साल बस सोने में गुजर देंगे। जरा सोचिए अगर आप इन सालो में सोए ना तो आप कितना कुछ कर सकते है, हेना?

नींद के अभाव से होने वाले परिणामों को जानने के लिए रशिया के कुछ वैज्ञानिकों ने एक प्रयोग किया, जिसमें उन्होंने लोगों को कई हफ्तों तक सोने नहीं दिया और जगाए रखा इसके बाद जो परिणाम सामने आए वह बहुत ही खौफनाक थे।

सन 1940 के अंत में रूसी सरकार ने राष्ट्रद्रोही माने जाने वाले पांच पुरुषों को इस प्रयोग के लिए चुना। प्रयोग का लक्ष्य था कि इन लोगों को एक विशेष प्रकार की गैस की छोटी सी खुराक दी जाए, जो की मनुष्य मैं नींद की आवश्यकता को समाप्त कर दें।



इन लोगों को एक सील कमरे में रखा गया ताकि शोधकर्ता इस गैस के संपर्क में ना आए और कैदियों को बात करने के लिए उनके पास सिर्फ माइक्रोफोन थे। उन कैदियों को कुछ किताबें, टॉयलेट, पानी, बिस्तर व इतना भोजन प्रदान किया गया जो कि 1 महीने के लिए पर्याप्त हो।

शुरुआत के 3 दिन तक तो सब कुछ ठीक चला। कैदियों से झूठा वादा किया गया था कि अगर वह सहयोग करते हैं, और 3 दिन तक नहीं सोते हैं, तो उन्हें मुक्त कर दिया जाएगा। प्रयोग के दौरान उनके सभी कार्यों और बातों पर निगरानी रखी जा रही थी। शोधकर्ताओं ने देखा कि पहले तो सभी अपने अतीत के बारे में बात कर रहे थे, परंतु 4 दिनों के पश्चात बातचीत थोड़ी अजीब होती गई।

Scary And Creepy Story Of Russian Sleep Experiment



पांचवें दिन तक कैदियों ने पागलपन जैसी हरकतें शुरू कर दी, और साथ ही वह अतीत की उन परिस्थितियों के बारे में शिकायत करने लगे जिसकी वजह से वह यहां पहुंचे थे। अब एक दूसरे से बात करने की जगह वह अपने माइक्रोफोन में फुसफुसाने लगे उन्होंने सोचा की वह अपने साथी कैदियों को धोखा देकर शोधकर्ताओं का भरोसा जीत लेंगे।

दसवे दिन कमरे में चीखने-चिल्लाने का माहौल शुरु हो गया। एक कैदी कमरे में आगे पीछे लगातार 3 घंटे तक भागने लगा और जोर जोर से चिल्लाने लगा जब तक उसकी आवाज कमजोर नहीं हो गई, और वहां धीरे से किचचकिचाते हुए अपनी आवाज के खो जाने के लिए डॉक्टरों को जिम्मेदार ठहराना लगा। अजीब बात तो यह थी कि अन्य कैदियों ने उसके चिल्लाने पर कोई भी प्रतिक्रिया नहीं दिखाई।



इसके बाद शोधकर्ता चिंतित हो गए क्योंकि उस कक्ष के अंदर से कोई भी आवाज नहीं आ रही थी। और 14 दिन उन्होंने कुछ अनियोजित किया। उन्होंने कैदियों से किसी प्रकार की प्रतिक्रिया पाने के लिए इंटरकॉम का इस्तेमाल किया और उन्होंने कहा कि यदि वह सहयोग करते हैं, तो उन्हें आजाद कर दिया जाएगा परंतु अंदर से आती एक शांत आवाज ने कहा “We no longer want to be freed” (अब हम आजाद नहीं होना चाहते हैं।)

15 दिन शोधकर्ताओं ने चेंबर में से उस  गैस को निकालकर ताजी हवा से बदल दिया परंतु कैदी वापस उस गैस के लिए गिड़गिड़ाने लगे। जब सैनिक उन केदियों को वापस लाने के लिए कक्षा में पहुंचे तो उन्होंने देखा कि वहां 5 में से सिर्फ चार केदी ही जिंदा थे, और भोजन को पिछले 5 दिनों से छुआ तक नहीं गया था। और पांचवा कैदी जो मृत था उसकी जांघ और छाती से मांस के टुकड़े गायब थे व पानी निकलने की नाली जाम होने की वजह से कमरे में 4 इंच तक पानी भर चुका था।

यहां तक कि वह चार लोग भी जो जीवित थे उनकी त्वचा भी गायब थी, और शरीर के जख्म  देख कर पता चल रहा था कि यह उनके स्वयं के द्वारा ही दिए गए हैं। यहां तक की सबसे अनुभवी सैनिक भी लाश को कक्षा से बाहर लाने से डर रहे थे।



मारे गए कैदी से दूसरे कैदियों को दूर करने के प्रयास में जो हिंसा हुई उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता । जब उनसे पूछा गया कि वह ऐसा व्यवहार क्यों कर रहे हैं? तब उन्हें बस एक वाक्य में जवाब मिला कि I must remain awake. (मुझे जागते रहना चाहिए।)

जल्दी ही सैनिकों शोधकर्ताओं ने कैदियों को गोली मारना शुरू कर दिया। जब उन पांचो में से सिर्फ एक कैदी ही बचा तो एक शोधकर्ता ने उससे पूछा “What are you?” (तुम क्या हो?)

“Have you forgotten so easily?” (तुम इतनी आसानी से भूल गए) उस कैदी ने मुस्कुराते हुए कहा। “We are you.” (हम आप ही है) हम तुम्हारे भीतर छिपा हुआ वो पागलपन है, जो तुम्हारे जंगली दिमाग से हर पल निकलने की कोशिश में रहता है। हम वो है, जो तुम हर रोज़ अपने बिस्तर के नीचे छिपाते हो। जब तुम रात को भोजन करने जाते हो तो हम चुप्पी में बैठे होते है, क्योकि हम जा नहीं सकते हैं, और शोधकर्ता ने कैदी के दिल में गोली मार दी और कैदी ने अपने अंतिम शब्दों में कहा “So… close…to…freedom.” (बहुत आजादी के बहुत करीब)।

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